Site icon Samriddhi

भारत ने एक कृषि-निर्भर औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था(1947) से वैश्विक आर्थिक पावरहाउस(2026) तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की है

15 Augest samriddhi

15 Augest samriddhi

1947 में स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था एक दयनीय अवस्था में थी। दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन ने देश के कृषि और पारंपरिक उद्योगों को नष्ट कर दिया था। उस समय भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान 50% से अधिक था, साक्षरता दर मात्र 12% थी, और देश अपनी खाद्य आवश्यकताओं के लिए भी विदेशी सहायता (विशेषकर अमेरिकी PL-480) पर निर्भर था।
विकास के प्रमुख चरण

1. नियोजित अर्थव्यवस्था और नेहरूवादी मॉडल (1947 – 1990):- स्वतंत्रता के बाद भारत ने ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ का विकल्प चुना, जिसमें भारी उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र (PSUs) को प्राथमिक आधार बनाया गया। पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से औद्योगिक नींव रखी गई। 1960 के दशक में ‘हरित क्रांति’ ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया। हालांकि, अत्यधिक लाइसेंसिंग, नौकरशाही के नियंत्रण और सख्त व्यापार प्रतिबंधों (‘लाइसेंस-परमिट राज’) के कारण विकास दर लगभग 3.5% प्रतिवर्ष पर ही सीमित रही, जिसे ‘हिन्दू विकास दर’ कहा गया।

2. 1991 के एलपीजी (LPG) सुधार:-1991 में गहरा भुगतान संतुलन (BoP) संकट पैदा हुआ, जिसके कारण भारत को अपना सोना गिरवी रखना पड़ा। तत्कालीन प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization), और वैश्वीकरण (Globalization) के सुधार लागू किए। लाइसेंस राज समाप्त हुआ, विदेशी निवेश (FDI) के दरवाजे खुले और निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन मिला।

3. सेवा क्षेत्र का उभार और आर्थिक तेज़ी (1992-2014):- इन सुधारों के बाद सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सेवा क्षेत्र ने असाधारण वृद्धि दर्ज की। भारत दुनिया का “बैक ऑफिस” बन गया। जीडीपी वृद्धि दर 7-8% के स्तर को छूने लगी और करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए।

4. डिजिटल क्रांति और वैश्विक महाशक्ति का उदय (2014 – 2026):- पिछले एक दशक में मेक इन इंडिया, जीएसटी (GST) जैसे प्रत्यक्ष कर सुधार, और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI) ने अर्थव्यवस्था का कायाकल्प कर दिया। जनधन योजना और डिजिटल लेन-देन ने वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व गति दी। कोविड महामारी की चुनौतियों के बावजूद भारत ने तेजी से वापसी की।

वर्तमान स्थिति और 2026 का परिदृश्यवर्ष 2026 तक भारत ब्रिटेन और जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आज भारत का कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर रहा है। आर्थिक संकेतक 1947 (स्वतंत्रता के समय) 2026 (वर्तमान स्थिति)जीडीपी (GDP)~$20 बिलियन \~$4.5+ ट्रिलियन (विश्व में तीसरी), खाद्यान्न स्थिति अकाल और आयात पर निर्भरप्रमुख निर्यातकों में शामिलआर्थिक इंजनकेवल पारंपरिक कृषिआईटी, सेवाएं, मैन्युफैक्चरिंग एवं डिजिटल फिनटेकडिजिटल इंफ्राशून्यविश्व का सबसे बड़ा यूपीआई (UPI) नेटवर्क

भविष्य की राह- भारत ने एक कृषि-निर्भर औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था से वैश्विक आर्थिक पावरहाउस तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की है। यद्यपि प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, आय असमानता को कम करना, और हरित ऊर्जा (Green Energy) में संक्रमण जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं, फिर भी भारत 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था और 2047 तक एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के लक्ष्य की ओर मजबूती से अग्रसर है।

Exit mobile version