भारत ने एक कृषि-निर्भर औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था(1947) से वैश्विक आर्थिक पावरहाउस(2026) तक की ऐतिहासिक यात्रा तय की है

15 Augest samriddhi

1947 में स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था एक दयनीय अवस्था में थी। दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन ने देश के कृषि और पारंपरिक उद्योगों को नष्ट कर दिया था। उस समय भारत की जीडीपी में कृषि का योगदान 50% से अधिक था, साक्षरता दर मात्र 12% थी, और देश अपनी खाद्य आवश्यकताओं के लिए भी … Read more

संसार के सभी गुण ‘कांचन’ अर्थात सोने (धन/रुपये) के आश्रित होते हैं।

Dhanvan samriddhi

यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः, स पण्डितः स श्रुतवान् गुणज्ञः। स एव वक्ता स च दर्शनीयः, सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति॥   (यह प्रसिद्ध श्लोक राजा भर्तृहरि द्वारा रचित ‘नीतिशतकम्’ से लिया गया है।)   शब्दार्थ और सरल भावार्थ यस्यास्ति वित्तं: जिसके पास धन (रुपया-पैसा) है स नरः कुलीनः: वही मनुष्य उच्च कुल का (सभ्य) माना जाता … Read more

आज के समय स्त्री वर्ग का आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना क्यों आवश्यक है?

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आज का युग आधुनिकता, तकनीक और बदलाव का युग है। समाज के हर क्षेत्र में बदलाव की बयार बह रही है, लेकिन इस बदलते दौर में एक प्रश्न सबसे अधिक प्रासंगिक और महत्त्वपूर्ण होकर उभरा है—”स्त्री वर्ग का आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना।” प्राचीनकाल से लेकर आधुनिक युग तक स्त्रियों की स्थिति में कई उतार-चढ़ाव … Read more

ऑनलाइन गेमिंग की लत: भटकाव और तबाही की राह पर आज का युवा वर्ग

young youth

आज का दौर डिजिटल क्रांति का दौर है। इंटरनेट और स्मार्टफोन की सुलभता ने हमारी जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। जहाँ एक ओर तकनीक ने ज्ञान, शिक्षा और नए अवसरों के द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी ओर इसके गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल ने एक गंभीर संकट को जन्म दिया है। इस संकट का सबसे बड़ा … Read more

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