संसार के सभी गुण ‘कांचन’ अर्थात सोने (धन/रुपये) के आश्रित होते हैं।
यस्यास्ति वित्तं स नरः कुलीनः, स पण्डितः स श्रुतवान् गुणज्ञः। स एव वक्ता स च दर्शनीयः, सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति॥ (यह प्रसिद्ध श्लोक राजा भर्तृहरि द्वारा रचित ‘नीतिशतकम्’ से लिया गया है।) शब्दार्थ और सरल भावार्थ यस्यास्ति वित्तं: जिसके पास धन (रुपया-पैसा) है स नरः कुलीनः: वही मनुष्य उच्च कुल का (सभ्य) माना जाता … Read more